🔴 सदर अस्पताल में ‘बच्चा एक्सचेंज ऑफर’! पहले बेटा, फिर बेटी — DM की जांच में 3 डॉक्टर समेत 7 पर गिरी गाज
✍️ सदर अस्पताल में मातृत्व नहीं बल्कि “मैटरनिटी मिस्ट्री” सामने आई है।
4 फरवरी को प्रसव के लिए भर्ती कराई गई महिला के परिवार को पहले पुत्र जन्म की खुशखबरी दी गई…
लेकिन एक घंटे बाद वही अस्पताल पुत्री थमा कर चुपचाप खिसकने लगा।
परिवार ने पूछा –
👉 “बेटा गया कहां?”
तो अस्पताल के पास जवाब नहीं, सिर्फ सफाई थी।
गोरौल थाना क्षेत्र की गुंजन देवी के परिजन जब बेटे के बदले बेटी मिलने पर भड़क उठे, तो सदर अस्पताल रणभूमि बन गया।
डॉक्टरों और नर्सों पर नवजात बदलने का सीधा आरोप लगा।
नगर थाना पुलिस को आकर मामला शांत कराना पड़ा।
पीड़िता की बहन संजू सिंह ने डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों पर नवजात की अदला-बदली का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई और जिलाधिकारी को भी शिकायत दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए DM ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई।
जांच में चौंकाने वाली बात सामने आई —
👉 डॉक्टर और कर्मियों के जवाब गोलमोल
👉 रिकॉर्ड में अस्पष्टता
👉 ड्यूटी में लापरवाही साफ
जांच रिपोर्ट आते ही जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाया और
3 डॉक्टर समेत कुल 7 कर्मियों पर कार्रवाई का आदेश दे दिया।
🔴 वैशाली सदर अस्पताल बना ‘चेंजिंग सेंटर’! नवजात की अदला-बदली के आरोप में 7 पर एक्शन, 3 डॉक्टर कटघरे में
✍️ सदर अस्पताल, जहां ज़िंदगी की पहली सांस ली जाती है, वहां अब भरोसे की सांस अटक गई है।
4 फरवरी को प्रसव के बाद परिजनों को पहले बेटे की सूचना दी गई…
लेकिन थोड़ी देर बाद अस्पताल प्रशासन ने कहानी बदल दी —
“बेटा नहीं, बेटी है।”
परिजनों का आरोप है कि यह सिर्फ जुबान की गलती नहीं, बल्कि बच्चा बदलने का खेल है।
सूचना मिलते ही अस्पताल में हंगामा शुरू हो गया।
डॉक्टर, नर्स और स्टाफ सवालों के घेरे में आ गए।
नगर थाना पुलिस को मौके पर पहुंचकर मामला संभालना पड़ा।
पीड़िता की बहन ने थाने में FIR कराई और DM को आवेदन दिया।
इसके बाद जांच समिति बनी —
अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम ने अस्पताल पहुंचकर स्टाफ से पूछताछ की।
जांच में सामने आया —
✔ संतोषजनक जवाब नहीं
✔ रिकॉर्ड में साफ तस्वीर नहीं
✔ जिम्मेदारी से बचने की कोशिश
नतीजा —
3 डॉक्टर समेत 7 लोगों पर कार्रवाई।
न्यूज पर्दाफाश की नजर में सवाल बड़ा है —
👉 जब जन्म के समय ही बच्चा “संदिग्ध” हो जाए
👉 तो सिस्टम की सेहत कैसी होगी?
यह सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं,
यह सरकारी अस्पतालों की साख का पोस्टमार्टम है।

