🟥 “दलालों का अड्डा बना सदर अस्पताल! आधी रात DM की रेड में खुली सिस्टम की पोल”
वैशाली सदर अस्पताल, जिसे मरीजों की जान बचाने का किला माना जाता है, वही अस्पताल आधी रात दलालों की मंडी बन चुका था। बीती देर रात जिलाधिकारी वर्षा सिंह जब औचक निरीक्षण पर पहुंचीं तो अस्पताल का सच खुद उनके सामने बेनकाब हो गया।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल उपाधीक्षक डॉक्टर गुड़िया कुमारी, अस्पताल मैनेजर मंजर आलम और जिला प्रोग्राम पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार सिंह ड्यूटी से गायब मिले। मतलब साफ है – जहां मरीज इलाज के लिए भटक रहे थे, वहां जिम्मेदार अफसर नींद में चैन ले रहे थे।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अस्पताल परिसर में दो निजी अस्पतालों के दलाल रंगे हाथों पकड़े गए। सदर अस्पताल के गेट पर खड़ी सात निजी एंबुलेंस को जिलाधिकारी ने जब्त कर लिया और दो एंबुलेंस चालकों को हिरासत में ले लिया गया।
DM ने मौके पर ही सख्त आदेश जारी किया कि अब ड्यूटी पर रहने वाले हर डॉक्टर और कर्मी को आई-कार्ड पहनना होगा। भर्ती मरीजों के परिजनों को भी आई-कार्ड मिलेगा। कोई भी तीसरा व्यक्ति अस्पताल में घूमता मिला तो उस पर सीधी कार्रवाई होगी।
🟥 “सदर अस्पताल में इलाज नहीं, सौदेबाज़ी! DM की छापेमारी में दलाल-डॉक्टर गठजोड़ उजागर”
वैशाली सदर अस्पताल में इलाज कम और सौदेबाज़ी ज्यादा चल रही थी। यही वजह है कि जैसे ही जिलाधिकारी वर्षा सिंह अचानक अस्पताल पहुंचीं, पूरा सिस्टम हिल गया।
निरीक्षण में तीन बड़े जिम्मेदार अधिकारी – अस्पताल उपाधीक्षक डॉक्टर गुड़िया कुमारी, अस्पताल मैनेजर मंजर आलम और जिला प्रोग्राम पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार सिंह ड्यूटी से नदारद मिले। सवाल उठता है कि जब अफसर ही गायब हों, तो मरीजों की सुनवाई कौन करे?
अस्पताल परिसर में दो निजी अस्पतालों के दलालों को पकड़कर प्रशासन ने साफ कर दिया कि मरीजों को निजी अस्पताल भेजने का खेल खुलेआम चल रहा था। गेट के बाहर खड़ी सात निजी एंबुलेंस जब्त की गईं और दो चालकों को हिरासत में लिया गया।
DM ने कड़े निर्देश देते हुए कहा कि अब अस्पताल में बिना आई-कार्ड कोई नहीं घूमेगा। मरीजों के परिजनों को भी पहचान पत्र मिलेगा। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

