🟥 धनबाद में ‘रेलवे नौकरी फैक्ट्री’ का भंडाफोड़! फर्जी मेडिकल, नकली ट्रेनिंग और असली लूट
बेरोजगारी की आग पर भरोसे का पेट्रोल डालकर नौकरी का सपना दिखाने वाला अंतरराज्यीय गिरोह आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। यह गिरोह युवाओं को स्पोर्ट्स कोटा में रेलवे नौकरी का झांसा देकर लाखों रुपये ऐंठता था। पहले अभ्यर्थियों को फर्जी स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट दिया जाता, फिर नकली मेडिकल बोर्ड बैठाकर “फिट” घोषित किया जाता और ऊपर से तीन महीने की दिखावटी ट्रेनिंग भी कराई जाती थी ताकि शक न हो।
पुलिस के मुताबिक दक्षिण भारत, दिल्ली और यूपी तक जाल फैला हुआ था। तमिलनाडु के एक युवक से 40 लाख से ज्यादा की ठगी ने पूरे रैकेट की परतें खोल दीं। छापेमारी में लग्जरी कार, फर्जी ज्वाइनिंग लेटर, मेडिकल सर्टिफिकेट, स्टंप-मुहर और नकदी बरामद हुई। सवाल यह है कि नकली सिस्टम इतने दिनों तक कैसे चलता रहा और इसमें किस-किस की मिलीभगत थी?
🟥 स्पोर्ट्स कोटा या ठगी कोटा? रेलवे नौकरी के नाम पर करोड़ों का खेल, पुलिस ने खोला नेटवर्क
नौकरी का सपना देखने वाले युवाओं को यह गिरोह पहले खिलाड़ी बनाता था—कागजों में। फिर उन्हें रेलवे अस्पताल जैसा माहौल दिखाकर नकली मेडिकल कराया जाता और अंत में फर्जी ज्वाइनिंग लेटर थमा दिया जाता। तीन महीने की ट्रेनिंग भी दी जाती थी ताकि पीड़ितों को लगे कि सब कुछ “ऑफिशियल” है।
सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव के मुताबिक गिरोह में 10 से अधिक लोग शामिल हैं। बरामद दस्तावेज बताते हैं कि ठगी का पैटर्न एक जैसा था—हर अभ्यर्थी से 6 से 7 लाख रुपये। जांच अब इस बात पर टिकी है कि ढोकरा स्टेशन और रेलवे अस्पताल में किन लोगों की भूमिका संदिग्ध रही। भारतीय रेलवे के नाम पर खेला गया यह फर्जीवाड़ा सिर्फ ठगी नहीं, बल्कि सिस्टम की सुरक्षा पर बड़ा सवाल है।


