🟥 पर्दाफाश: बिहार में लाल ईंटों पर हाईकोर्ट का ‘लाल कार्ड’, सरकार को लगा पर्यावरण का झटका! ✍️
बिहार में सरकारी निर्माण कार्यों में धड़ल्ले से चल रहे लाल ईंटों के इस्तेमाल पर अब अदालत की नजर पड़ गई है। पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश देते हुए ढांचागत परियोजनाओं में लाल ईंटों के उपयोग पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया है।
जस्टिस संदीप कुमार ने ब्रिक्स फर्म की याचिका पर सुनवाई करते हुए साफ कहा कि यह मामला सिर्फ निर्माण का नहीं, बल्कि पर्यावरण की खुली अनदेखी का है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि बिहार में स्कूल भवनों के निर्माण में अब लाल ईंटों का इस्तेमाल नहीं होगा।
कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि सभी सरकारी परियोजनाओं में पर्यावरण नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। साथ ही पश्चिमी चंपारण के जिलाधिकारी को आदेश दिया गया कि जोगापट्टी के चिमनिया बाजार में निर्माणाधीन 560 बेड वाले आवासीय स्कूल भवन में लाल ईंटों का प्रयोग तुरंत बंद कराया जाए।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अब सरकारी निर्माण योजनाओं में फ्लाई ऐश ईंटों का इस्तेमाल अनिवार्य होगा। अधिकारियों को पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्रालय द्वारा 31 दिसंबर 2021 को जारी निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है।
🟥 पर्दाफाश: फ्लाई ऐश ईंटों की जगह लाल ईंटें! कोर्ट ने पूछा – नियमों की हत्या किसके आदेश से? ✍️
पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार और संबंधित विभागों से तीखा सवाल पूछा है कि जब नियम कहता है कि थर्मल पावर प्लांट के 300 किलोमीटर दायरे में सभी निर्माण कार्यों में फ्लाई ऐश ईंटों का शत-प्रतिशत उपयोग होगा, तो फिर लाल ईंटों का इस्तेमाल कैसे हो रहा था?
कोर्ट ने इसे पर्यावरणीय नियमों का खुला उल्लंघन बताया और बिहार शैक्षणिक ढांचागत विकास निगम लिमिटेड से जवाब तलब किया कि पश्चिम चंपारण में बन रहे आवासीय स्कूल भवन में लाल ईंटें क्यों लगाई जा रही थीं, जबकि नियमानुसार फ्लाई ऐश ईंटें इस्तेमाल होनी चाहिए थीं।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता गिरिजेश कुमार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वे अपने क्लाइंट को नियमों के अनुसार निर्माण कराने की सलाह देंगे। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी 2026 को होगी।
अब बड़ा सवाल यही है कि वर्षों से चल रही इस लापरवाही के पीछे किसकी जिम्मेदारी तय होगी और क्या सरकारी निर्माण योजनाएं सच में पर्यावरण के अनुकूल बनेंगी?


