🟥 “सोशल मीडिया पोस्ट से पुलिस रेड तक: पूर्व आईपीएस अमिताभ दास के घर कानून की दस्तक”
नीट छात्रा मौत केस में सोशल मीडिया पर उछले बयानों ने अब कानूनी शक्ल अख्तियार कर ली है। पटना के पाटलिपुत्र कॉलोनी स्थित फ्लैट नंबर-22 में पुलिस ने छापेमारी कर पूर्व आईपीएस अमिताभ दास को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई चित्रगुप्तनगर थाना कांड संख्या 44/26 के तहत की गई।
पुलिस का आरोप है कि एक्स, यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर किए गए पोस्ट भ्रामक और उत्तेजक थे, जिनसे मामले की जांच प्रभावित हो सकती थी। जिस शंभू गर्ल्स हॉस्टल की छात्रा की मौत पर पहले से ही माहौल संवेदनशील है, वहां इस तरह के पोस्ट आग में घी का काम कर रहे थे।
अब सवाल उठ रहा है—क्या सोशल मीडिया कोर्ट बन सकता है? या फिर जांच एजेंसियों को अपना काम करने देना चाहिए? पुलिस का कहना है कि डिजिटल सबूत खंगाले जा रहे हैं और पूरे नेटवर्क की जांच होगी।
🟥 “DNA टेस्ट की मांग, FIR की बारिश: NEET केस में बयानबाजी बनी आफत”
NEET छात्रा मौत मामले में बयान देकर सुर्खियों में आए पूर्व आईपीएस अमिताभ दास अब खुद जांच के घेरे में हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर यह कहकर सनसनी फैला दी थी कि मुख्यमंत्री के पुत्र निशांत कुमार का डीएनए टेस्ट कराया जाए और सीएम आवास में आने-जाने वालों की भी जांच हो।
पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में ये आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं पाए गए। इसके बाद इसे “जांच को भटकाने और भड़काने” वाला मामला मानते हुए एफआईआर दर्ज की गई। छापेमारी के दौरान दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त कर जांच की जा रही है।
यह मामला अब सिर्फ एक छात्रा की मौत का नहीं, बल्कि यह बहस भी बन गया है कि अभिव्यक्ति की आजादी की सीमा कहां खत्म होती है और कानून की शुरुआत कहां से होती है। राजनीति भी इसमें कूद पड़ी है, जिससे मामला और गरमा गया है।


