🔴 “धमाके जंगल में, लाशें गांव में: महुआटांड़ का कोयला साम्राज्य हाथियों की पीठ पर खड़ा!” बोकारो जिला का महुआटांड़ थाना क्षेत्र के तिरला, दुधमटिया, धवैया, जागेश्वरविहार और बड़कीपुन्नी के जंगल आज हरियाली नहीं, बारूद की गंध उगल रहे हैं। जंगल की छाती में ड्रिल मशीन घुसती है, फिर धमाका होता है और उसकी गूंज सीधे गांवों में मातम बनकर पहुंचती है।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे अवैध कोयला खनन खेल के केंद्र में एक नाम है — अंसारी बंधु । कहा जाता है कि उसे ‘वसीम’ के इशारों और तथाकथित “मैनेजमेंट सिस्टम” का ऐसा कवच मिला है कि शिकायतें जंगल से निकलने से पहले ही दम तोड़ देती हैं। ब्लास्टिंग के बाद कोयला निकालने के लिए भारी मशीनें और ट्रिप-टेलर लगाए जाते हैं। नतीजा – हाथियों के प्राकृतिक कॉरिडोर उजड़ जाते हैं। डरे हुए हाथी जंगल छोड़कर गांवों में घुसते हैं।
बड़कीपुन्नी और गंगपुर की मौतें इसी अवैध साम्राज्य की खूनी रसीद हैं।
यह महज कोयला चोरी नहीं —
यह वह सौदा है जहां
➡ माफिया मुनाफा कमाता है
➡ हाथी भटकते हैं
➡ और ग्रामीण अपनी अर्थियां उठाते हैं
🔴 “रंगा सियार शेर की खाल में: अंसारी बंधु की तिकड़ी और सिस्टम की चुप्पी का रहस्य”
पिछले छह महीनों से लगातार हो रही ब्लास्टिंग ने हाथियों के पारंपरिक रास्तों को कब्रिस्तान में बदल दिया है। वैज्ञानिक तथ्य चीख-चीखकर बताते हैं कि तेज धमाके और कंपन हाथियों को हिंसक बना देते हैं, फिर भी जंगल में रोज विस्फोट होते हैं।
सवाल उठता है —
👉 क्या महुआटांड़ पुलिस को धमाके सुनाई नहीं देते?
👉 क्या वन विभाग की आंखों पर “मैनेजमेंट” की पट्टी बंधी है?
👉 या फिर अंसारी की पहुंच अवैध खदानों तक जाने से पहले ही रास्ता बंद कर देती है?
सूत्र बताते हैं कि यह नेटवर्क ऐसा जाल बुन चुका है जहां सूचनाएं सिस्टम के भीतर ही निष्क्रिय कर दी जाती हैं।
जंगल उजड़ता है,
कॉरिडोर टूटते हैं,
और इंसान–हाथी संघर्ष तय हो जाता है।
अगर समय रहते इस गठजोड़ पर प्रहार नहीं हुआ तो महुआटांड़ का जंगल धीरे-धीरे श्मशान में बदल जाएगा।
रंगा सियार अब शेर की खाल ओढ़ चुका है —
और अगला दांव अवैध कोयले को “वैध” बनाने की तैयारी है।
अगला धमाका… सिर्फ पर्दाफाश पर!


