🟥 “बिना बैनर, भरा अनाज! सरायकेला में सरकारी ट्रक बना ‘रहस्यमयी वाहन’”
सरायकेला जिले के गम्हरिया प्रखंड में सरकारी अनाज की ढुलाई अब किसी जासूसी मिशन जैसी हो गई है। बड़ाम थाना के पास जब 173 बोरी सरकारी अनाज से लदा एक मालवाहक वाहन पकड़ा गया, तो उसमें सबसे खास बात यह थी कि उस पर खाद्य आपूर्ति विभाग का कोई बैनर ही नहीं था। यानी अनाज सरकारी… पर पहचान निजी!
ड्राइवर का कहना था कि उसे गोदाम से तय जगह तक अनाज पहुंचाने का आदेश मिला है, लेकिन सवाल यह है कि अगर सब कुछ नियम के अनुसार है तो पहचान छिपाने की जरूरत क्यों पड़ी? विभागीय नियम कहते हैं कि हर डोर-स्टेप डिलीवरी वाहन पर सरकारी बैनर अनिवार्य है, ताकि कालाबाजारी रोकी जा सके। लेकिन यहां तो बैनर गायब और शक हाजिर!
अब चर्चा है कि क्या यह सिर्फ “भूल” है या फिर सरकारी अनाज को निजी माल बनाने की कोई पुरानी चाल फिर से चालू हो गई है?
🟥 पुराना गोदाम, नया खेल! गम्हरिया में फिर उठी अनाज घोटाले की बू”
गम्हरिया का अनाज गोदाम पहले भी विवादों की प्रयोगशाला बन चुका है। कभी संदिग्ध आग, कभी रहस्यमयी मौत और अब बिना बैनर अनाज की ढुलाई — मानो कहानी हर बार नया अध्याय जोड़ रही हो। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना अधिकारियों की ‘मूक सहमति’ के सरकारी अनाज यूं खुलेआम नियम तोड़ते हुए सड़क पर नहीं निकल सकता।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस ट्रांसपोर्टर की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, उसका नाम पहले भी विवादों में सामने आ चुका है। मतलब पात्र पुराने हैं, सिर्फ स्क्रिप्ट बदली है।
नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने साफ कहा है कि अगर यह मामला यूं ही दबा दिया गया, तो यह सिर्फ एक ट्रक की बात नहीं रहेगी, बल्कि पूरी वितरण व्यवस्था पर सवालिया निशान लग जाएगा।
अब सवाल यह नहीं कि अनाज कहां जा रहा था, बल्कि यह है कि सिस्टम आंख मूंदकर क्यों बैठा था?

