😱 महाशिवरात्रि मेले का “तीखा सच” – गोलगप्पे बने ज़हर, 100 से ज्यादा बच्चे बीमार
पांकी प्रखंड के द्वारिका इलाके में लगे महाशिवरात्रि मेले की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं, जब गोलगप्पे खाने के बाद 100 से अधिक बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन से तड़पते बच्चों को देखकर गांवों में हड़कंप मच गया। रघुआखाड़ मेले में द्वारिक, यादव टोला, जमुआटांड़, रिमी और रामपुर गांव के बच्चों ने गोलगप्पे खाए थे।
स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और प्राथमिक इलाज के बाद दर्जनों बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। एंबुलेंस कम पड़ गई, तो परिजन बाइक और निजी गाड़ियों से बच्चों को अस्पताल लाते दिखे। सवाल यह है कि मेले में बिक रहे खाद्य पदार्थों की जांच कौन करता है? हर साल उत्सव आता है, लेकिन लापरवाही का स्वाद वही रहता है—तीखा और खतरनाक।
⚠️ फूड पॉइजनिंग या प्रशासनिक लापरवाही? पांकी में गोलगप्पा कांड से दहशत
पांकी थाना क्षेत्र में हुए इस हादसे ने खाद्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार बच्चों ने जैसे ही मेला से लौटकर गोलगप्पा खाया, रात से ही तबीयत बिगड़ने लगी। सुबह होते-होते हालत गंभीर हो गई। सोनू गुप्ता, कुमार गुप्ता और विनोद यादव जैसे अभिभावकों ने बताया कि उनके बच्चे भी इस “खट्टे स्वाद” का शिकार बने।
चिकित्सा प्रभारी महेंद्र प्रसाद ने इसे फूड पॉइजनिंग बताया और कहा कि स्थिति नियंत्रण में है। वहीं प्रखंड प्रमुख पंचम प्रसाद और सांसद प्रतिनिधि सत्य प्रकाश पांडे ने मौके पर पहुंचकर इलाज की व्यवस्था करवाई। लेकिन असली सवाल अब भी हवा में तैर रहा है—क्या मेले में बिकने वाले खाने की जांच सिर्फ हादसे के बाद होगी? या अगली बार फिर कोई मेला किसी अस्पताल का विस्तार बनेगा?


