🚨 रेल की रफ्तार पर जंगल की नाराज़गी भारी – हाथी का बच्चा घायल, ट्रैक पर डेरा डालकर झुंड ने रोकी ट्रेने
लातेहार जिले में बरकाकाना–टोरी रेलखंड उस वक्त ठहर गया जब टोरी–महुआमिलान स्टेशन के बीच एक मालगाड़ी की चपेट में हाथी का बच्चा आ गया। सोमवार शाम करीब 7:30 बजे चंदवा थाना क्षेत्र के पुतरी टोला गांव के पास हाथियों का झुंड रेलवे लाइन पार कर रहा था, तभी डाउन लाइन पर ट्रेन आ गई। टक्कर इतनी तेज थी कि हाथी का बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया।
घटना के बाद झुंड वहीं जमा हो गया और किसी को पास फटकने नहीं दे रहा। नतीजा—अप और डाउन दोनों लाइनों पर रेल परिचालन ठप। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन आक्रोशित हाथियों को हटाना आसान नहीं रहा। रांची–दिल्ली गरीब रथ एक्सप्रेस राय स्टेशन पर और बरकाकाना–पटना पलामू एक्सप्रेस खलारी स्टेशन पर रोक दी गई। सवाल उठ रहा है कि क्या रेलवे और वन विभाग के बीच समन्वय सिर्फ हादसे के बाद ही जागता है?
🧐 एक साल में दूसरी बार वही कहानी – ट्रेन से घायल हाथी का बच्चा, वन विभाग फिर कटघरे में
बरकाकाना–बरवाडीह रेलखंड पर हाथियों के लिए खतरा अब “रूटीन” बनता जा रहा है। महुआमिलान–निद्रा सेक्शन के पास हुई ताजा घटना ने बीते 18 अक्टूबर 2024 की याद दिला दी, जब ट्रेन की चपेट में आने से हाथी के बच्चे की मौत हो गई थी। इस बार बच्चा तो बच गया, लेकिन गंभीर हालत में है और पूरा झुंड घटनास्थल पर डटा है।
स्टेशन अधीक्षक टोरी ने पुष्टि की कि हादसे के बाद से दोनों लाइनों पर परिचालन बंद है। सवाल यह है कि संवेदनशील वन क्षेत्र में ट्रेनों की रफ्तार पर नियंत्रण और हाथियों की निगरानी व्यवस्था आखिर कहां है? क्या हर बार हादसे के बाद ही चेतावनी बोर्ड और पेट्रोलिंग की बातें होंगी? यह घटना सिर्फ दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का आईना बन गई है।


