🟥 सारंडा में जंगल भी सुरक्षित नहीं! लकड़ी चुनने गए ग्रामीणों पर नक्सलियों का मौत का जाल – IED ब्लास्ट से दो गंभीर घायल
चाईबासा के सारंडा जंगल में एक बार फिर नक्सलियों की खौफनाक करतूत सामने आई है। जंगल से साल पत्ता और लकड़ी चुनने गए दो निर्दोष ग्रामीण अचानक उस “मौत के जाल” में फंस गए, जिसे नक्सलियों ने जमीन के नीचे बिछा रखा था।
यह घटना चाईबासा जिले के जराईकेला थाना क्षेत्र अंतर्गत तिरिलपोसी गांव की है, जहां नक्सलियों द्वारा पहले से लगाए गए आईईडी बम की चपेट में आकर दोनों ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए। धमाके की आवाज से पूरा जंगल थर्रा उठा और इलाके में दहशत फैल गई।
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, दोनों पीड़ित रोज की तरह जंगल में पत्ता और लकड़ी चुनने गए थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि जमीन के नीचे बारूद उनका इंतजार कर रहा है। धमाके के बाद ग्रामीणों ने किसी तरह घायलों को बाहर निकाला और तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
घटना की पुष्टि खुद चाईबासा एसपी अमित रेणु ने की है। उन्होंने बताया कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोट में दो ग्रामीण घायल हुए हैं और फिलहाल उनकी पहचान की प्रक्रिया जारी है। सुरक्षाबल पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं ताकि और किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जंगल में आम ग्रामीण अपनी रोजी-रोटी के लिए जाते हैं, तो क्या अब उन्हें हर कदम सोच-समझकर रखना होगा? क्या सारंडा का जंगल अब सिर्फ नक्सलियों का बारूदी मैदान बनता जा रहा है?
सारंडा का जंगल, जो कभी हरियाली और जीवन का प्रतीक था, अब बारूद और डर की पहचान बनता जा रहा है। यह घटना नक्सलियों की उस साजिश को उजागर करती है, जिसमें आम जनता को ही ढाल और शिकार दोनों बनाया जा रहा है।

