🔴 फूल तोड़ने गए थे, बारूद पर पैर पड़ गया! चाईबासा के तिरिलपोसी जंगल में IED ब्लास्ट, दो ग्रामीण जिंदगी से जंग लड़ रहे
✍️ चाईबासा।
सारंडा के घने जंगल अब हरियाली से ज्यादा खौफ उगा रहे हैं।
तिरिलपोसी जंगल क्षेत्र में मंगलवार देर शाम नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोट की चपेट में आकर दो ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए।
घायलों की पहचान सलई चेरवा और जयसिंह चेरवा के रूप में हुई है, जो फूल तोड़ने जंगल गए थे। करीब पाँच किलोमीटर भीतर जैसे ही उन्होंने कदम रखा,
जंगल की खामोशी को चीरता हुआ तेज धमाका हुआ…
और दो जिंदगियां लहूलुहान हो गईं। बताया जा रहा है कि नक्सलियों ने सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए जंगलों में जगह-जगह आईईडी बिछा रखे हैं,
लेकिन चपेट में आ रहे हैं — बेगुनाह ग्रामीण।
घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई है।
लोग जंगल जाने से कतरा रहे हैं,
लेकिन मजबूरी ये है कि उनकी रोजी-रोटी वनोपज पर टिकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से पहले चेतावनी दी गई थी,
🔴 सारंडा के जंगल में मौत का जाल! IED की चपेट में आए दो ग्रामीण, इलाके में दहशत का साया
✍️ सारंडा का जंगल, जो कभी जीवन देता था,अब हर कदम पर मौत का संदेश दे रहा है।
चाईबासा के तिरिलपोसी जंगल क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोट में
दो ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए। वे जंगल से फूल और वनोपज लाने गए थे,
लेकिन लौटे — खून और कराह के साथ।जानकारी के अनुसार नक्सली सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने के लिए घने और दुर्गम इलाकों में बारूदी सुरंगें बिछा रहे हैं।
इन विस्फोटकों का शिकार हो रहे हैं —
वे लोग, जिनका नक्सल से कोई लेना-देना नहीं।
घटना के बाद गांवों में भय का माहौल है।
लोग कह रहे हैं —
“जंगल जाएंगे तो जान जाएगी,
न जाएंगे तो चूल्हा नहीं जलेगा।”
यह सिर्फ ब्लास्ट की खबर नहीं,
यह आदिवासी जीवन की मजबूरी की कहानी है।


