🟥 “रोज़ी-रोटी पर डंडा! मरीन ड्राइव बना ‘धरना बनाम दमन’ की लड़ाई का मैदान”
दो दिनों से पटना के मरीन ड्राइव पर फुटपाथी दुकानदार अपनी दुकानों के लिए वैकल्पिक जगह की मांग कर रहे थे। आरोप है कि शुक्रवार रात धरनास्थल पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे दुकानदारों पर लाठीचार्ज किया। दुकानदारों का कहना है कि वे शांतिपूर्वक बैठे थे, लेकिन अचानक कार्रवाई शुरू हो गई।
स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि सरकारी दुकानों के नाम पर उन्हें हटाया जा रहा है, जबकि वे वर्षों से यहां रोज़ी-रोटी चला रहे हैं। नोंकझोंक के दौरान महिलाएं और बुजुर्ग भी सहमे दिखे। इस पूरी घटना ने सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या शहर की सुंदरता के नाम पर गरीबों की रोज़ी कुर्बान की जा रही है?
पर्दाफाश यह कि जब हक की मांग सड़क पर आती है, तो जवाब डंडे से मिलता है। प्रशासन की चुप्पी और कार्रवाई का तरीका अब राजनीतिक बहस का मुद्दा बनता जा रहा है।
🟥 “धरने से अस्पताल तक? फुटपाथी दुकानदारों ने पुलिसिया कार्रवाई पर उठाए सवाल”
मरीन ड्राइव पर बैठे दुकानदारों और पुलिस के बीच तीखी बहस ने शुक्रवार रात हिंसक मोड़ ले लिया। दुकानदारों का आरोप है कि उन्हें बिना चेतावनी पीटा गया और उनकी ठेलियां हटाने की कोशिश की गई। वे कहते हैं कि नगर निगम की नीति सीधे तौर पर छोटे कारोबारियों के खिलाफ है।
दुकानदारों का दावा है कि वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना हटाया जाना अन्याय है। कई लोग वर्षों से यहीं काम कर अपने परिवार पाल रहे हैं। पुलिस का कहना है कि भीड़ नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया गया।
यह मामला अब सिर्फ अवैध अतिक्रमण का नहीं, बल्कि आजीविका के अधिकार का बन गया है। पर्दाफाश यही है कि शहर के विकास की तस्वीर में फुटपाथी दुकानदारों की जगह अब भी सवालों के घेरे में है—क्या समाधान संवाद से निकलेगा या फिर डंडे से?


