🟥 “इंसाफ की जीत, हैवान की हार”
स्कूल गई मासूम, टूटा भरोसा… एक साल बाद अदालत ने सुनाया 20 साल का इंसाफ | News Pardaफाश एक्सक्लूसिव ✍️
औरंगाबाद। स्कूल की राह पर निकली मासूम को क्या पता था कि वह दिन उसकी जिंदगी का सबसे डरावना दिन बन जाएगा। किताबें हाथ में थीं और भरोसा दिल में… लेकिन रास्ते में वह भरोसा चकनाचूर कर दिया गया। घटना के बाद बच्ची डर के साए में घर लौटी। हिम्मत जुटाकर मां और चाची को सच बताया। इसके बाद परिवार ने बिना देर किए थाना का दरवाजा खटखटाया। यहीं से शुरू हुई न्याय की लंबी लड़ाई। पोक्सो कोर्ट ने आरोपी प्रिंस कुमार (निवासी – कासमा) को नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी मानते हुए 20 वर्ष सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं देने पर 3 महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अभियोजन पक्ष ने 7 गवाह पेश किए। बचाव पक्ष भी अपने गवाह लाया, लेकिन सच्चाई भारी पड़ी। अदालत ने सभी सबूतों और गवाहियों को गंभीरता से परखा और आरोपी को कानून के शिकंजे में कस दिया।
यह फैसला सिर्फ एक केस का अंत नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है —
👉 मासूमों पर हाथ डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
👉 न्याय भले देर से मिले, लेकिन मिलता जरूर है।
आज उस बच्ची के जख्म भरें या न भरें, मगर अदालत ने यह साबित कर दिया कि कानून अब भी पीड़ितों के साथ खड़ा है।
🟥 एंगल–2 : “डर के साये से कानून की रोशनी तक”
डरी-सहमी मासूम, एक साल की लड़ाई और 20 साल की सजा… पोक्सो कोर्ट का सख्त संदेश | News Pardaफाश रिपोर्ट ✍️
औरंगाबाद। सुबह करीब 10 बजे स्कूल जाने के लिए निकली नाबालिग बच्ची को नहीं पता था कि रास्ते में उसका इंतजार एक दरिंदा कर रहा है। बहला-फुसलाकर उसे बंद जगह ले जाया गया और उसके बचपन पर हमला किया गया। घंटों बाद घर छोड़ी गई बच्ची के चेहरे पर डर और आंखों में खामोशी थी। मां और चाची को सच बताया गया। उसी दिन थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई और कानून की गाड़ी चल पड़ी। जांच, मेडिकल, बयान, गवाह और कोर्ट की प्रक्रिया… पूरा एक साल बीत गया। आखिरकार पोक्सो कोर्ट ने आरोपी प्रिंस कुमार को दोषी मानते हुए 20 साल की सश्रम कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। विशेष लोक अभियोजक शिवलाल मेहता के अनुसार अदालत ने सभी साक्ष्यों को गंभीरता से जांचा। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष दोनों की गवाही सुनी गई।
यह फैसला सिर्फ एक अपराधी को सजा नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने वाला फैसला है
👉 नाबालिगों पर अपराध = कठोर सजा
👉 कानून से कोई नहीं बचेगा
यह मामला हर माता-पिता को सावधान करता है और हर अपराधी को चेतावनी देता है कि अब खामोशी नहीं, सख्त कार्रवाई होगी।

