🟥 “इंस्पेक्टर ऑफिस बना दरिंदगी का अड्डा! CCTV ने खोला मां-बेटी हत्याकांड का काला सच”
दुमका के वीर कुंवर सिंह चौक स्थित इंस्पेक्टर कार्यालय परिसर में हुआ मां-बेटी का जघन्य हत्याकांड अब पुलिस के लिए भी शर्म का सबब बन गया है। जिस जगह को कानून का किला कहा जाता है, वहीं दरिंदगी की इबारत लिख दी गई। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी जैनुल अंसारी ने सुनसान का फायदा उठाकर पहाड़िया आदिवासी महिला को बहला-फुसलाकर ऑफिस के पीछे ले गया। वहां दुष्कर्म कर उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी गई। पहचान खुलने के डर से 6 साल की मासूम बच्ची को भी मौत के घाट उतार दिया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यह पूरा घटनाक्रम सीसीटीवी में कैद हो गया, लेकिन शहर सोता रहा और दरिंदा फरार होता रहा। अब गिरफ्तारी हुई है, पर सवाल यह है – अगर कैमरे थे तो सुरक्षा क्यों नहीं थी? यह केस सिर्फ हत्या नहीं, सिस्टम की लापरवाही का पोस्टमार्टम है।
🟥 “मासूम की चीखें और सिस्टम की चुप्पी! मां-बेटी हत्याकांड ने उघाड़ी सुरक्षा की पोल”
दुमका के इंस्पेक्टर कार्यालय परिसर में मां-बेटी की हत्या ने पूरे शहर को हिला दिया है। आरोपी जैनुल अंसारी ने पहले महिला की आबरू लूटी, फिर मां और बच्ची दोनों को मार डाला। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के सहारे आरोपी को दबोच लिया, लेकिन सवाल यह है कि इतनी बड़ी वारदात पुलिस दफ्तर के ठीक पीछे कैसे हो गई?
फुटेज में आरोपी मां-बेटी को ले जाते हुए साफ दिखता है, फिर भी किसी ने टोका नहीं, किसी ने रोका नहीं। वारदात के बाद आरोपी मोबाइल बंद कर गायब हो गया, लेकिन तकनीकी सेल ने उसका रास्ता काट लिया। आरोपी के पास से लूटे गए 5 हजार रुपये और बैंक पासबुक भी बरामद हुई है।
यह केस सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर तमाचा है। अब जनता पूछ रही है – अगर पुलिस ऑफिस के पास जान सुरक्षित नहीं, तो आम गली-मोहल्लों का क्या हाल होगा?


