🟥 “होटल या हिडन अड्डा? ‘आश्रय’ बना ग्रामीणों के गुस्से का कारण”
धनबाद जिले के धनबाद अंतर्गत कतरास थाना क्षेत्र के मान सिंह करवा मुरना स्थित ‘आश्रय’ होटल पर शुक्रवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। होटल को लेकर आरोप था कि वहां लंबे समय से अनैतिक गतिविधियां चुपचाप चल रही थीं। नाराज ग्रामीणों ने कतरास–बाघमारा मुख्य मार्ग को जाम कर दिया, जिससे घंटों यातायात ठप रहा।
ग्रामीणों का कहना है कि रोजाना युवक-युवतियों का आना-जाना गांव का माहौल बिगाड़ रहा था और स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चों पर भी गलत असर पड़ रहा था। उनका दावा है कि इस संबंध में पहले भी पुलिस को लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से मजबूरन सड़क पर उतरना पड़ा।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर होटल संचालक और आधा दर्जन युवक-युवतियों को हिरासत में लिया। होटल से मोटरसाइकिल, दस्तावेज, लैपटॉप और जेरॉक्स मशीन बरामद हुई। पर्दाफाश यही है कि ‘आश्रय’ नाम के पीछे गांव वालों को एक और ही कहानी नजर आ रही थी।
🟥 “शिकायतों के बाद भी चुप्पी क्यों? सड़क जाम ने खोली पुलिस कार्रवाई की फाइल”
ग्रामीणों के हंगामे के बाद कतरास पुलिस हरकत में आई और स्थिति को नियंत्रित किया। कतरास थाना क्षेत्र में हुए इस घटनाक्रम ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो सड़क जाम जैसी नौबत नहीं आती।
थाना प्रभारी आसित कुमार ने बताया कि पहले भी होटल की जांच हुई थी और उस समय कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई थी। फिलहाल संचालक और पकड़े गए युवक-युवतियों की उम्र सत्यापन और पूछताछ की जा रही है। सभी दस्तावेजों की जांच कर वरीय अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा रही है।
ग्रामीणों की मांग है कि होटल को सील किया जाए और भविष्य में दोबारा संचालन न हो। यह मामला अब सिर्फ अनैतिक गतिविधियों का नहीं, बल्कि यह भी सवाल बन गया है कि शिकायतों पर कार्रवाई क्यों देर से होती है। पर्दाफाश यह कि जब जनता सड़क पर उतरती है, तब ही सिस्टम जागता है।


