🟥 “आधी रात गांव बना रणभूमि: केदला से आए 5 हाथियों ने अंगों पंचायत में मचाया कोहराम”
बोकारो
इलाके से निकले पांच हाथियों का झुंड जब हजारीबाग जिला के चुरचू प्रखंड की अंगों पंचायत पहुंचा, तो गांव में सन्नाटा नहीं बल्कि चीख-पुकार उतर आई। स्थानीय ग्रामीण राजेंद्र बताते हैं कि गोंडवार बस्ती में उस रात हालात किसी डरावनी कहानी से कम नहीं थे। जैसे ही खबर फैली कि हाथी घुस आए हैं, लोग जान बचाने को घर छोड़कर भागे, लेकिन हाथियों ने ग्रामीणों को दौड़ा-दौड़ा कर निशाना बनाया। कोई सूंड से उछालता दिखा, तो कोई पैरों से रौंदता रहा। कई घर क्षतिग्रस्त हो गए। इस तांडव में दो बच्चे, दो महिलाएं और दो पुरुष समेत छह लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक ही परिवार के चार सदस्य शामिल हैं। “न्यूज पर्दाफाश” पूछता है—क्या यह हमला अचानक था या चेतावनी के बाद भी अनदेखी की गई?
🟥 “हाथी पागल या सिस्टम सुस्त? अंगों की रात ने खोली जंगल से लेकर थाने तक की पोल”
अंगों पंचायत के सरकारी स्कूल के समीप गोंडवार गांव जहां ज्यादा तर भुइया समाज के लोग रहते है में जो हुआ, वह सिर्फ जंगली जानवरों का हमला नहीं, बल्कि तैयारियों की परीक्षा थी—और सिस्टम फेल दिखा। आधी रात पांच हाथी गांव में घुसे और बेकाबू होकर लोगों के पीछे-पीछे दौड़े। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भागते ग्रामीणों को कभी सूंड से पटका गया तो कभी पैरों तले कुचला गया। नतीजा—छह मौतें, कई उजड़े घर और गांव में दहशत। घटना के बाद थाना, रेंजर और फॉरेस्टर मौके पर पहुंचे, लेकिन ग्रामीण शव उठाने नहीं दे रहे और सुरक्षा की मांग पर अड़े हैं। सवाल उठ रहा है कि हाथियों की मूवमेंट की सूचना पहले क्यों काम में नहीं आई? क्या अलर्ट सिस्टम सिर्फ कागजों में है? “न्यूज पर्दाफाश” मानता है—यह त्रासदी जंगल की नहीं, लापरवाही की कहानी भी है।


