🔴 “आदित्यपुर में मेयर नहीं, प्रतिष्ठा का चुनाव! दो पूर्व मुख्यमंत्रियों की जंग में फंसी भाजपा”
सरायकेला : आदित्यपुर नगर निगम में मेयर चुनाव अब विकास से ज्यादा सियासी वर्चस्व की लड़ाई बनता जा रहा है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे भाजपा के भीतर की खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा के घोषित समर्थित प्रत्याशी को लेकर है, जो कथित तौर पर दो पूर्व मुख्यमंत्रियों की सियासी रस्साकशी में फंसे नजर आ रहे हैं। एक ओर दिल्ली से जुड़े बड़े नेता रणनीति गढ़ रहे हैं, तो दूसरी ओर एक पूर्व मुख्यमंत्री अपने करीबी प्रत्याशी को जिताने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। पार्टी के भीतर गुटबाजी और कार्यकर्ताओं की आपसी दूरी ने हालात को और उलझा दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह अंदरूनी जंग यूं ही जारी रही, तो इसका सीधा फायदा विपक्ष को मिल सकता है।
🔴 “पर्दाफाश एक्सक्लूसिव: होटल की बैठक, फोटो सेशन और सियासी फूट”
आदित्यपुर का मेयर चुनाव अब गलियों की राजनीति से निकलकर होटलों के बंद कमरों तक पहुंच गया है। चर्चा है कि रणनीति जमीन पर नहीं, बल्कि बड़े होटलों में हाई-प्रोफाइल फोटो सेशन के साथ तय हो रही है। वहीं, पूर्व मेयर के कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं—जिन्हें भाजपा कैडर का चेहरा बताया जाता था, उनके कार्यकाल में निगम की कई योजनाएं अधूरी रह गईं और ठेकेदार राज के आरोप लगे। यहां तक कि हाईकोर्ट तक मामले पहुंचे। विपक्ष इन मुद्दों को हथियार बनाकर मतदाताओं के बीच उतार चुका है। पार्टी के नए जिला अध्यक्ष के सामने तीनों नगर निकायों में जीत की चुनौती है, लेकिन सियासी गलियारों में चर्चा है कि हार की स्थिति में ठीकरा उन्हीं के सिर फोड़ा जा सकता है। ऐसे में यह चुनाव अब विकास नहीं, बल्कि नेतृत्व की अग्निपरीक्षा बन गया है।


