🟥 “कोयले का काला साम्राज्य! सेहदा गांव बना अवैध डंपिंग का अड्डा, विभागों की चुप्पी पर बड़ा सवाल”
हजारीबाग जिले के बड़कागांव थाना क्षेत्र अंतर्गत गोंदलपुरा पंचायत का सेहदा गांव इन दिनों कोयले के काले कारोबार का केंद्र बनता जा रहा है। गांव के चारों ओर खुलेआम कोयले का अवैध डंप किया जा रहा है और यह खेल किसी अंधेरे में नहीं, बल्कि दिनदहाड़े चल रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, रोजाना ट्रैक्टर और भारी वाहनों से बड़ी मात्रा में कोयले की ढुलाई और भंडारण किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी गतिविधि के बावजूद फॉरेस्ट विभाग, पुलिस विभाग और माइनिंग विभाग की नजरें जैसे जानबूझकर बंद हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोयला माफिया बेखौफ होकर काम कर रहे हैं और विभागीय चुप्पी ने इनके हौसले और बुलंद कर दिए हैं। सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अफसरों की फाइलों में सब कुछ “सामान्य” बताया जा रहा है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते इस अवैध कारोबार पर लगाम नहीं लगी, तो पूरा इलाका कोयला माफिया के कब्जे में चला जाएगा। अब सवाल यह है
🟥 “दिनदहाड़े कोयले की तस्करी! सेहदा गांव में खुलेआम अवैध डंप, प्रशासनिक लापरवाही उजागर”
सेहदा गांव आज कोयले की अवैध डंपिंग का नया ठिकाना बन चुका है। ट्रैक्टरों और भारी वाहनों से रोजाना कोयले का भंडारण किया जा रहा है और यह सब प्रशासन की आंखों के सामने हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि फॉरेस्ट विभाग, पुलिस और माइनिंग विभाग को इसकी पूरी जानकारी है, फिर भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे साफ संकेत मिलता है कि या तो विभागीय सिस्टम सो रहा है या फिर इस अवैध कारोबार को मौन समर्थन मिल रहा है।
अवैध डंपिंग से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि सरकारी खजाने को भी लाखों रुपये का चूना लगाया जा रहा है। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और कोयला तस्करों के साथ-साथ उन्हें संरक्षण देने वालों पर भी कार्रवाई हो। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन कब तक इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे रहता है।


