🔴 डर की क्लास! श्रद्धानंद सेवाश्रम स्कूल में पढ़ाई नहीं, ‘धमकी पाठ्यक्रम’ चल रहा है? ✍️
रांची के रातू रोड स्थित श्रद्धानंद सेवाश्रम स्कूल इन दिनों पढ़ाई से ज़्यादा डर की वजह से चर्चा में है। आरोप है कि यहां की एक शिक्षिका बच्चों के लिए ज्ञान की नहीं, खौफ की गुरु बन चुकी हैं। सूत्रों के मुताबिक, शिक्षिका निधि के खिलाफ जिला शिक्षा अधिकारी को गुप्त नाम से शिकायत दी गई है। शिकायत में साफ लिखा गया है कि शिक्षिका बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करती हैं और धमकी देती हैं।
मामला तब और गंभीर हो गया जब बच्चों के अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन से शिकायत की कि शिक्षिका अक्सर अवकाश में रहती हैं, जिससे सिलेबस पूरा नहीं हो पा रहा। लेकिन जैसे ही यह शिकायत शिक्षिका तक पहुंची, बच्चों पर कथित तौर पर अत्याचार और बढ़ गया।
एक छात्र ने पर्दाफाश से कहा, “मैडम से इतना डर लगता है कि स्कूल जाने का मन ही नहीं करता।”
डर का असर सीधा पढ़ाई पर पड़ रहा है — किताबें खुलने से पहले आंखों में डर खुल जाता है।
अब सवाल यह है कि क्या स्कूल शिक्षा का मंदिर है या डर का अड्डा?
और क्या जिला शिक्षा विभाग बच्चों के भविष्य की इस ‘डरावनी कहानी’ पर संज्ञान लेगा?
🔴 टीचर या टॉर्चर? बच्चों के मन पर भारी पड़ रही शिक्षिका की धमकी!
✍️ श्रद्धानंद सेवाश्रम स्कूल का नाम सेवा और संस्कार से जुड़ा है, लेकिन यहां की एक शिक्षिका की कार्यशैली ने इस नाम पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
गुप्त आवेदन के जरिए जिला शिक्षा पदाधिकारी को बताया गया है कि शिक्षिका निधि बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करती हैं। बच्चों को धमकाना, डराना और अपमानित करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।
आरोप है कि शिक्षिका लंबे समय तक अवकाश पर रहती हैं, जिससे पाठ्यक्रम अधूरा रह गया। जब अभिभावकों ने इसकी शिकायत स्कूल प्रबंधन से की, तो कथित तौर पर इसका गुस्सा बच्चों पर निकाला गया।
स्थिति यह है कि कई बच्चे स्कूल जाना ही छोड़ चुके हैं।
पढ़ाई से ज़्यादा उन्हें रोज यह डर सताता है कि आज क्लास में क्या होगा?
पर्दाफाश पूछता है—
👉 क्या शिक्षा का मतलब डर पैदा करना है?
👉 क्या बच्चों की मानसिक सेहत से बड़ा कोई सिलेबस है?
अब निगाहें जिला शिक्षा अधिकारी की कार्रवाई पर टिकी हैं।


