बोकारो बना ‘किडनैपिंग बेल्ट’? बच्चों के बाद अब महिलाएं निशाने पर, नकली प्रेस गाड़ी से उठाने की कोशिश का पर्दाफाश
झारखंड में सक्रिय बच्चा चोर और महिला अगवा गैंग अब बेखौफ होकर सड़कों पर उतर चुका है। बोकारो में लगातार हो रही महिलाओं और बच्चों की गुमशुदगी ने पूरे जिले को दहशत में डाल दिया है। हालात ऐसे हैं कि अब महिलाएं खुद से सवाल कर रही हैं — क्या हम अपने ही शहर में सुरक्षित हैं? गुरुवार को सेक्टर-4 थाना क्षेत्र में जो हुआ, उसने डर को हकीकत में बदल दिया। बैंक में काम करने वाली एक महिला रोज की तरह काम खत्म कर पैदल घर लौट रही थी। जैसे ही वह केंद्रीय विद्यालय के पास पहुंची, तभी काले रंग की एक गाड़ी उसके पास आकर रुकी। गाड़ी में तीन महिलाएं पहले से बैठी थीं और चालक भी महिला ही थी।
महिला से जबरन कहा गया कि वह गाड़ी में बैठ जाए, यह कहते हुए कि उसे “घर छोड़ देंगे।” जब बैंक कर्मी महिला ने मना किया, तो दबाव बढ़ाया गया। इसी दौरान महिला के फोन पर कॉल आ गया और वह जोर से बात करने लगी। अचानक वह अज्ञात गाड़ी तेज रफ्तार में वहां से फरार हो गई। महिला को शक हुआ कि यह कोई साधारण मदद नहीं, बल्कि वही गिरोह हो सकता है जो बच्चों और महिलाओं को अगवा कर रहा है। चौंकाने वाली बात यह रही कि उस गाड़ी पर “प्रेस” लिखा हुआ था, जिससे भरोसा जीतने की कोशिश की गई।
इस पूरी घटना की जानकारी बोकारो सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष लीला देवी को दी गई। उन्होंने मामले को गंभीर मानते हुए तुरंत बोकारो एसपी और स्थानीय थाना को सूचित किया। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि
👉 क्या वह गाड़ी सच में मीडिया से जुड़ी थी?
👉 या “प्रेस” का बोर्ड लगाकर अपहरण का नया तरीका अपनाया गया था?
यह घटना सिर्फ एक महिला की सूझबूझ से टली वारदात नहीं, बल्कि सिस्टम के सामने खड़ा बड़ा सवाल है।
प्रेस’ की आड़ में अपराध? बोकारो में महिला अपहरण की कोशिश, पुलिस की सतर्कता पर उठे सवाल
बोकारो में महिलाओं का अचानक गायब होना अब आम खबर बनती जा रही है। कभी बच्चा गायब, कभी महिला लापता — और कई मामलों में आज तक कोई सुराग नहीं। इन घटनाओं ने पूरे शहर को डर के साये में जीने पर मजबूर कर दिया है।
गुरुवार की घटना ने पुलिस प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया। एक बैंक कर्मी महिला को जिस तरह से जबरन गाड़ी में बैठाने की कोशिश हुई, वह यह दिखाता है कि अपराधी अब वेश बदलकर वारदात को अंजाम दे रहे हैं।
लीला देवी ने साफ शब्दों में कहा है कि अब सिर्फ आम गाड़ियों से ही नहीं, बल्कि “प्रेस” या “पुलिस” लिखी गाड़ियों से भी सतर्क रहने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि अपराधी लोगों का भरोसा जीतने के लिए ऐसे बोर्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं, ताकि कोई शक न करे।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वह काली गाड़ी किसकी थी और उसमें सवार महिलाएं कौन थीं।
यह भी जांच की जा रही है कि
✔️ यह एक संगठित गैंग है या अकेली घटना?
✔️ पहले जिन महिलाओं और बच्चों के गायब होने की खबरें आईं, उनका इससे कोई संबंध है या नहीं?
बोकारो की महिलाएं अब सिर्फ सवाल नहीं कर रहीं, बल्कि जवाब चाहती हैं —
आखिर हमारी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
और सबसे बड़ा सवाल —
क्या यह ‘मदद’ की आड़ में चल रहा अपहरण का नया खेल है?
पर्दाफाश जारी है…


